Home >> Research Studies & Projects >> Ongoing Research Projects



Ongoing Research Projects
जारी अनुसंधान परियोजनाएं

Collapse All   कोलैप्स ऑल      Expand All   एक्सपेंड ऑल

1. A Study of Prevailing Right to Food Situation among BPL Families in Bihar and Uttar       Pradesh
       बिहार एवं उत्तर प्रदेश के बी.पी.एल. परिवारों में विद्यमान भोेजन के अधिकार से संबंधित स्थिति का अध्ययन

    National Human Rights Commission entrusted a research study to HARYALI Center for Rural Development, New Delhi in September 2012. Its objectives are - to find out the socio-economic status and living conditions of the BPL families; understand whether the BPL families have physical and economic access to adequate food or means for its procurement; study the extent of gender discrimination practiced with regard to food items and assessment of dietary pattern of male and female children and adults at the household level; find out the impact of food grains provided under the public distribution system as well as food provided under ICDS and Mid-day Meal Schemes in overcoming the problem of malnutrition and starvation particularly among children; ascertain the incidence and prevalence of morbidity and mortality among BPL families and children due to under-nutrition and starvation; assess the role of civil society organizations and private institutions in catering to the needs of BPL families; and prepare strategies for reducing the problem of starvation among BPL families and children and improve their nutritional status.

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने सितम्बर, 2012 में ’हरियाली’ सेंटर फोर रूरल डेवलपमेंट, नई दिल्ली को एक अनुसंधान अध्ययन का कार्य सौंपा था। इसका उद्देश्य- बी.पी.एल. परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति एवं जीवन-यापन की दशाओं का पता लगाना तथा यह जानना कि बी.पी.एल. परिवारों को पर्याप्त भोजन अथवा इसके प्राप्ति के साधनों की पहुंच कहां तक है? इसके साथ ही, घरेलू स्तर पर खाद्य पदार्थों के संबंध में किए जाने वाले लिंग भेदभाव का पता लगाना तथा लड़के एवं लड़की तथा वयस्कों के आहार संबंधी ढांचे का अध्ययन करना; लोक वितरण प्रणाली (पी.डी.एस.) के तहत मुहैया करवाए गए खाद्यान्न के साथ-साथ आई.सी.डी.एस. के तहत मुहैया कराए गए भोजन तथा खासतौर पर बच्चों को कुपोषण एवं भुखमरी की समस्या से निपटने के लिए मुहैया कराए गए मिड-डे मील के प्रभाव को जानना; बी.पी.एल. परिवारों एवं बच्चों में कम पोषण एवं भुखमरी के कारण रोगों की संख्या एवं मृत्युदर की घटनाओं एवं मौजूदगी का पता लगाना; बी.पी.एल. परिवारों की खान-पान की जरूरतों के संबंध में नागर समाज संगठनों एवं निजी संस्थानों की भूमिका का आकलन करना; तथा बी.पी.एल. परिवारों एवं बच्चों में भुखमरी की समस्या को कम करने तथा उनकी पोषण स्थिति को सुधारने के लिए नीतियां बनाना।


2. Human Rights of Elderly Persons: Law, Policies and Implementation- A Study with       Special Reference to Kerala
       वृद्ध जनों के मानव अधिकारः कानून, नीति एवं कार्यान्वयन- केरल के विशेष संदर्भ में एक अध्ययन

    The above study was commissioned by the NHRC to the Center for Human Rights, the National University of Advanced Legal Studies, Kalamassery, Kochi in February 2016. It is to be completed within a time frame of 18 months. The objectives of the research study are to- analyze the categories of elderly persons; examine the problems faced by them; examine the rationale in enacting laws to protect the rights of elderly persons in the backdrop of social realities; inspect the scope of protection given to elderly persons; scrutinize the reach of policies and programmes proposed by the Government for them ; analyze the provisions of all laws applicable to them; make an assessment of the implementation of the Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 and other related laws in Kerela, including in adjoining Southern States; and come up with recommendations for effective reforms for their betterment.

        In view of the large scale migration of Keralite youth to countries abroad, the study will also examine whether these migration trends are leading to possible isolation of elderly people, lack of their security in physical as well as financial terms. In addition, the research study will examine whether the benefits of social security schemes for elderly persons are reaching the right intended beneficiaries or not.

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा फरवरी, 2016 में सेन्टर फाॅर ह्यूमन राइट्स नेशनल यूनिवर्सिटी आॅफ एडवांस लीगल स्टडीज, कलामस्सेरी, कोच्चि को उक्त अध्ययन का कार्य सौंपा गया था। इस कार्य को 18 महीने की समयावधि में पूर्ण किया जाना है। अनुसंधान अध्ययन के उद्देश्य हैं- वृद्ध लोगों की श्रेणी का विश्लेषण; उनके द्वारा की जा रही समस्याओं का पता लगाना; सामाजिक वास्तविकताओं की पृष्ठभूमि में वृद्ध लोगों के अधिकारों का संरक्षण करने के लिए कानून लागू करने में तर्क का पता लगाना; वृद्ध लोगों को दिए गए संरक्षण के क्षेत्र का निरीक्षण; उनके लिए सरकार द्वारा प्रस्तावित नीतियों एवं कार्यक्रमों की पहुंच की संवीक्षा करना;उनके लिए उपयुक्त सभी कानूनों के उपबंधों का विश्लेषण करना; केरल तथा नज़दीकी दक्षिणी राज्यों में ’अभिभावक एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 तथा अन्य संबंधित कानूनों के कार्यान्वयन का आकलन करना; तथा उनकी बेहतरी के लिए प्रभावी सुधारों हेतु संस्तुतियां तैयार करना।

    विदेशों के लिए केरल के युवाओं का बड़ी संख्या में प्रवास करने की दृष्टि से इस अध्ययन में इस बात की भी जांच की जाएगी कि क्या उनकी ये प्रवृत्तियां उनके वृद्ध लोगों के वित्तीय सुरक्षा की कमी का कारण तो नहीं हैं। इसके अलावा, अनुसंधान अध्ययन में इसकी भी जांच की जाएगी कि क्या वृद्ध लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभ उनके सही लाभार्थीयों तक पहुंच रहे हैं या नहीं।


3. Country Assessment/National Inquiry on Human Rights in the Context of Sexual        and Reproductive Health and Well-being
       यौन और प्रजनन स्वास्थ्य एवं कल्याण के संदर्भ में मानव अधिकारों पर देश का आकलन/राष्ट्रीय जांच

    The ‘Country Assessment/National Inquiry on Human Rights in the Context of Sexual and Reproductive Health and Well-being’ has been undertaken by the NHRC in the March 2016. For the purpose of the national inquiry, the research study has been commissioned to two Delhi-based organizations namely, ‘Partners for Law in Development’ (PLD) and ‘SAMA- Resource Group for Women and Health’. The main objectives of the research study are to - cover the domestic/national laws, policies and existing gaps pertaining to the sexual and reproductive health rights as in accordance to international standards. Further, it would look into the overlapping components of sexual rights and reproductive rights.The Research work will be carried out in two stages – desk work and interactions with key experts working in the area covering North to South and West to East zone.

    राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा मार्च, 2016 में “यौन और प्रजनन स्वास्थ्य एवं कल्याण” के संदर्भ में मानव अधिकारों पर देश का आकलन/राष्ट्रीय जांच की शुरूआत की गई। इस राष्ट्रीय जांच के उद््देश्य हेतु दो दिल्ली स्थित संगठनों, ’पार्टनर्स फाॅर लाॅ इन डेवलेपमेंट’ (पी.एल.डी.) एवं समा रिसोर्स ग्रुप फाॅर विमेन एण्ड हेल्थ को दायित्व सौंपा गया। इस अनुसंधान अध्ययन का मुख्य उद्देश्य घरेलू/राष्ट्रीय कानून, नीति एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार यौन और प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों के संबंध में विद्यमान अंतर को शामिल करना था। तत्पश्चात्, यह यौन तथा प्रजनन अधिकारों के अतिव्यापी अवयवों की जांच-पड़ताल करेगा। यह अनुसंधान अध्ययन को दो चरणों में पूरा किया जाएगा पहला डेस्क कार्य तथा दूसरा उत्तर से दक्षिण एवं पश्चिम से पूर्वी क्षेत्र में कार्यरत मुख्य विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श।


4. Study on Human Rights of Transgender as a Third Gender
      तीसरे जेंडर के रूप में ट्रांसजेंडर के मानव अधिकारों पर अध्ययन  

    The research study entitled ‘Study on Human Rights of Transgender as a Third Gender’ has been undertaken by NHRC in collaboration with Kerala Development Society (KDS), New Delhi in March 2015. The main objective of the present research is to study the socio-economic profile of transgender as the third gender groups. The study will examine the various kinds of discrimination and the violation of human rights issues faced by transgender and to evaluate the problems faced by transgender for receiving the benefits of the various government programmes related to education and employment and reasons for their exclusion. Further this study will make in-depth analysis of the programmes/schemes launched and facilities provided for transgender by the Centre, State or Local Government as well as of the laws and policies, if any, along with the Supreme Court judgment and the steps taken for the overall development of the transgender.

    “तीसरे जेंडर के रूप में ट्रांसजेंडर के मानव अधिकारों पर अध्ययन“ नामक इस अनुसंधान अध्ययन की शुरूआत राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा केरल विकास समाज (के.डी.एस.) के सहयोग से मार्च, 2015 को नई दिल्ली में की गई। वर्तमान अध्ययन का मुख्य उद्देश्य तीसरी जेंडर समूहों के रूप में ट्रांसजेंडरों के सामाजिक, आर्थिक रूपरेखा का अध्ययन करना था। यह अध्ययन भेद-भाव के विभिन्न प्रकारों की जांच तथा ट्रांसजेंडरों से संबंधित मानव अधिकार उल्लंघन के मुद्दों एवं उनके बहिष्कार सहित शिक्षण एवं रोजगार संबंधी विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों की सुविधाएं प्राप्त करने हेतु ट्रांसजेंडर द्वारा सामना की जा रही समस्याओं का मूल्यांकन करेगा। इसके अलावा, यह अध्ययन केन्द्र, राज्य या स्थानीय सरकार के साथ-साथ कानून एवं नीति, यदि कोई हो, के साथ-साथ सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय एवं ट्रांसजेंडरों के समग्र विकास हेतु उठाए जाने वाले कदम हेतु प्रदान की जाने वाली सुविधाओं एवं शुरूआत किए गए कार्यक्रमों/योजनाओं का गहन विश्लेषण करेगा।


5. The Human Rights Issues Related to Right to Education of Children of Migrant        Labourers in Kerala’
       केरल में प्रवासी श्रमिकों के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार’ संबंधी मानव अधिकार मुद्दे।

    A research project entitled ‘The Human Rights Issues Related to Right to Education of Children of Migrant Labourers in Kerala’ has been entrusted by the NHRC to Dr. Sibi Zacharias of Sacred Heart College, Thevara, Kerala in November 2014. The main objective of the study is to enquire whether the children of the migrant labourers in Kerala are denied their right to education due to the migration of their parents in search of employment. The study will compare the education level of migrant labourers children residing in Kerala as well as their respective States. The study will analyze the factors responsible for the educational backwardness of the migrant labourers children.

   ’केरल में प्रवासी श्रमिकों के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार’ नामक इस अध्ययन का कार्यभार राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा डाॅ. सी.बी.जचारियास आॅफ सैक्रेट हर्ट काॅलेज, थेवड़ा केरल को नवम्बर, 2014 में सौंपा गया। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य केरल में प्रवासी मजदूरों के बच्चों को उनके माता-पिता के रोजगार हेतु प्रवास की वजह से शिक्षा के अधिकार से वंचित रखने संबंधी मामले की जांच करना था। यह अध्ययन केरल में तथा संबंधित राज्यों में रह रहे प्रवासी श्रमिक मज़दूरों की शिक्षा के स्तर की तुलना करेगा। यह अध्ययन प्रवासी श्रमिकों के बच्चों के शैक्षिक पिछड़ेपन के लिए जिम्मेदार कारकों का विश्लेषण करेगा।


6. Development of 27 Booklets on 11 Themes by MARG in Collaboration with NHRC
       एन.एच.आर.सी. के सहयोग से एम.ए.आर.जी. द्वारा 11 विषयों पर 27 पुस्तिकाओं का विकास

    NHRC in collaboration with Multiple Action Research Group (MARG), New Delhi started a project in November 2015 to develop booklets on different human rights themes on the rights of vulnerable and marginalized and spread legal awareness about the same in terms of knowledge of law, respect for rights and skills to secure rights. In all, MARG will develop 27 booklets covering 11 themes. These booklets will be easy to use and can be accessed by those with basic literally skills. Each book will include illustrations for the purpose of better understanding of its users/readers. The booklets will be initially written in English, and later translated and printed in Hindi.

    राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, मल्टीपल एक्शन रिसर्च ग्रुप (एम.ए.आर.जी.), नई दिल्ली के सहयोग से नवम्बर, 2015 में कमज़ोर तथा हासिए के लोगों के अधिकारों हेतु तथा उनके कानूनी ज्ञान, अधिकारों के प्रति सम्मान एवं अधिकारों की रक्षा कुशलता के बारे में कानूनी जागरूकता के प्रसार हेतु विभिन्न मानव अधिकार विषयक पुस्तिकाओं के प्रकाशनार्थ एक परियोजना की शुरूआत की। समग्र रूप से, एम.ए.आर.जी. 11 विषयों पर 27 पुस्तिकाओं का प्रकाशन करेगा। ये पुस्तकें प्रयोग में आसान तथा मूल साहित्यिक कौशलता वाले लोगों के लिए भी सुगम होंगी। प्रत्येक पुस्तक में अपने पाठकों/उपभोक्ताओं को बेहतर समझाने हेतु चित्र शामिल होंगे। ये पुस्तकें शुरूआत में अंग्रेजी में लिखीं जांएगी एवं बाद में इसका हिन्दी में अनुवाद तथा मुद्रण करवाया जाएगा।


7. Interrogating Violence against Women from the other Side: An Exploratory Study        into the World of Perpetrators
       महिलाओं के खिलाफ हिंसा की दूसरे पहलू से पूछताछ- अपराधियों के संसार का एक शोधपरक अध्ययन

    The study ‘Interrogating Violence against Women from the other Side: An Exploratory Study into the World of Perpetrators’ is undertaken by NHRC in August 2014 along with Centre for Women’s Development (CWDS), New Delhi. The rationale of the research is to gain insight into the perceptions of male perpetrators accused of crimes against women and girls in Delhi. The study attempts to gain an understanding of the perpetrators of crimes against women with a particular focus on the economic cultural and psychological factors that configure their identities and life-worlds. The study involves in-depth individual and group interviews with a sample of adult perpetrators accused and/or convicted of violence against women lodged in Tihar Jail to gauge their perspectives on the crimes they are alleged to have committed. The case study method would be used to profile the offenders. The study will draw inferences on the intersections of gender, violence, crime and social transformation with a particular focus on urban India.

       “दूसरे पहलू से महिलाओं के खिलाफ हिंसा की पूछ-ताछः अपराधियों के संसार का एक शोधपरक अध्ययन“ की शुरूआत राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा अगस्त, 2014 में सेंटर फाॅर विमेंस डेवलपमेंट (सी.डब्ल्यू.डी.एस.), नई दिल्ली के साथ की गई। इस प्रकार के अध्ययन का मूल कारण दिल्ली में महिलाओं एवं लड़कियों के खिलाफ अपराध के आरोपी पुरूष अपराधियों की धारणाओं का अध्ययन करना था। इस अध्ययन के पीछे आर्थिक, सांस्कृतिक एवं मनौविज्ञानिक कारकों पर आधारित महिलाओं के खिलाफ अपराध से संबंधित अपराधियों की सोच को परखना है जो उनकी पहचान एवं जीवन-शैली को समरूप बनाता है। इस अध्ययन में तिहाड़ जेल में बंद महिलाओं के खिलाफ हिंसा से संबंधित दोषियों की अपराध के पीछे की विचारधारा से संबंधित व्यक्तित्व तथा सामूहिक साक्षात्कार शामिल है। यह मामला अध्ययन अपराधियों के रूप-रेखा में मदद करेगा। यह अध्ययन मुख्यतः शहरी भारत में जेंडर, हिंसा, अपराध एवं सामाजिक स्थानान्तरण पर निष्कर्ष आकर्षित करेगा।


8. National Research Study on Human Trafficking
       मानव तस्करी पर राष्ट्रीय अनुसंधान अध्ययन

    The project ‘National Research on Human Trafficking in India’ is being undertaken by the NHRC in collaboration with Tata Institute of Social Sciences (TISS), Mumbai. The main objectives of the present study is to estimate the nature and extent of human trafficking, assessing the economics/finances of human trafficking, to understand the changing dimensions of human trafficking, and to identify social, economic, political, cultural causes at the household, community and regional level of exploitation. The study attempts to understand the theory behind the issue to examine the current response system and to suggest and recommend the way forward to address the gaps identified through research.

       “मानव तस्करी पर राष्ट्रीय अनुसंधान अध्ययन“ नामक परियोजना की शुरूआत राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा टाटा समाज विज्ञान संस्थान (टिस), मुम्बई के सहयोग से की गई। इस वर्तमान अध्ययन के मुख्य उद्देश्य मानव तस्करी की प्रकृति एवं सीमा का प्राक्कलन, मानव तस्करी की आर्थिक/आमदनी को निर्धारित करना, मानव तस्करी के बदलते आयामों को समझना एवं आवास, समुदाय एवं क्षेत्रीय स्तर पर शोषण के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक कारणों की पहचान थे। इस अध्ययन का मूल कारण वर्तमान प्रतिक्रिया पद्धति की जांच के मुद्दों के पीछे के सिद्धांत को समझना तथा इस अनुसंधान से सामने आई कमियों को संबोधित करने हेतु सुझाव तथा सिफारिश करना था।


(Last updated on 28.06.2017)

Top