एनएचआरसी, भारत ने2024 में मानव अधिकारों पर अपनी लघु फिल्मों की प्रतियोगिता के सात विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए
प्रेस विज्ञप्ति
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग
नई दिल्ली: 26 मार्च, 2025
एनएचआरसी, भारत ने2024 में मानव अधिकारों पर अपनी लघु फिल्मों की प्रतियोगिता के सात विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए
एनएचआरसी, भारत के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री वी. रामसुब्रमण्यन ने कहा कि मानव अधिकारों पर आयोग की लघु फिल्म प्रतियोगिता पिछले एक दशक से मानव अधिकारों के बारे में जागरूकता पैदा करने के अपने उद्देश्य को प्रभावी ढंग से पूरा कर रही है
उन्होंने कहा कि 2015 से देश के विभिन्न हिस्सों से विभिन्न भाषाओं में एनएचआरसी लघु फिल्म प्रतियोगिता में प्रविष्टियों की बढ़ती संख्या मानव अधिकारों के बारे में बढ़ती जागरूकता को दर्शाती है
विजेताओं को बधाई देते हुए उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को मानव अधिकारों का ब्रांड एंबेसडर बताया
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी), भारत ने आज 2024 में मानव अधिकारों पर अपनी लघु फिल्म प्रतियोगिता के सात विजेताओं को सम्मानित करने और पुरस्कार प्रदान करने के लिए नई दिल्ली में अपने परिसर में एक समारोह का आयोजन किया। सभा को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति श्री वी. रामसुब्रमण्यन, अध्यक्ष, एनएचआरसी, भारत ने कहा कि आयोग का उद्देश्य मानव अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति जागरूकता पैदा करना है। मानव अधिकारों पर इसकी लघु फिल्म प्रतियोगिता पिछले एक दशक से इस उद्देश्य को बहुत प्रभावी ढंग से पूरा कर रही है। इस अवसर पर एनएचआरसी के सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ) बिद्युत रंजन सारंगी और श्रीमती विजया भारती सयानी, महासचिव श्री भरत लाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यन ने कहा कि 2015 में इस प्रतियोगिता के उद्घाटन के समय केवल 40 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुई थीं। अपने दसवें वर्ष, 2024 में, देश के विभिन्न भागों से 300 से अधिक प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं। इससे पता चलता है कि मानव अधिकार जागरूकता और इस आयोजन ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक के लोगों के बीच कितनी लोकप्रियता हासिल की है, जो विभिन्न भारतीय भाषाओं में विभिन्न मानव अधिकारों पर फिल्में बनाने और लोगों को उनके बारे में जागरूक करने का विकल्प चुन रहे हैं, जिसे जानकर खुशी होती है।
सात पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए न्यायमूर्ति सुब्रमण्यन ने कहा कि पुरस्कृत फिल्मों ने मानव अधिकारों के कई मुद्दों को छुआ है, जिनमें नदी जल प्रदूषण, पीने योग्य पानी का मूल्य, बाल विवाह और शिक्षा, वृद्ध व्यक्तियों के अधिकार, कुछ धार्मिक प्रथाओं के कारण अधिकारों का उल्लंघन, महिलाओं के अधिकार और घरेलू हिंसा शामिल हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों की सराहना की और उन्हें मानव अधिकारों का ब्रांड एंबेसडर बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले साल वे मानव अधिकारों पर और अधिक फिल्में बनाएंगे और पुरस्कार जीतेंगे।
इससे पहले एनएचआरसी, भारत के सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ) बिद्युत रंजन सारंगी ने अपने भाषण में कहा कि सभी सातों फिल्मों में अलग-अलग संदेश हैं। उन्होंने कहा कि फिल्में लोगों के बीच मानव अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन करने का एक प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने विशेष रूप से डॉक्युमेंट्री दूध गंगा पर प्रकाश डाला, जो दर्शाती है कि प्रदूषण ने घाटी के परिदृश्य को कैसे बदल दिया है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
एनएचआरसी, भारत की सदस्य श्रीमती विजया भारती सयानी ने कहा कि विजेताओं ने कहानियों को जीवंत बनाने के लिए अथक परिश्रम किया है, ताकि रूढ़िवादिता को चुनौती दी जा सके, सामाजिक बाधाओं को तोड़ा जा सके और लोगों को सोचने, महसूस करने और कार्य करने के लिए सशक्त बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि उनका समर्पण केवल फिल्म निर्माण के बारे में नहीं है, बल्कि एक बेहतर दुनिया के लिए वकालत, साहस और प्रतिबद्धता के बारे में है। उनके द्वारा कैप्चर किया गया हर फ्रेम और दिया गया संदेश एक बड़े उद्देश्य की ओर योगदान देता है, जहाँ मानवीय गरिमा का सम्मान किया जाता है, आवाज़ सुनी जाती है और न्याय होता है।
इससे पहले, एनएचआरसी, भारत के महासचिव, श्री भरत लाल ने अपने उद्घाटन भाषण में एनएचआरसी की लघु फिल्म प्रतियोगिता का अवलोकन दिया, जो 2015 में शुरू हुई थी और प्रत्येक वर्ष गुणवत्ता वाली फिल्मों की प्रविष्टियों की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि 2024 में प्रतियोगिता के दसवें संस्करण के लिए कुल 303 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं। प्रारंभिक जांच के बाद, 243 प्रविष्टियाँ पुरस्कारों के लिए मैदान में उतरीं, जिनका निर्णय तीन दौर की कठोर जूरी प्रक्रिया द्वारा किया गया, जिसमें एनएचआरसी अध्यक्ष और सदस्यों की अध्यक्षता में अंतिम दौर और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सात विजेताओं का फैसला किया गया। उन्होंने कहा कि सभी पुरस्कृत फिल्में पिछले वर्षों की तरह आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की जाएंगी। ये सरकारी विभागों, प्रशिक्षण और शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ नागरिक समाज द्वारा मानव अधिकार जागरूकता उद्देश्यों के लिए स्क्रीनिंग के लिए खुली हैं।
एनएचआरसी, भारत के निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल वीरेंद्र सिंह ने पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा की। इंजीनियर अब्दुल रशीद भट की फिल्म ‘दूध गंगा- वेलीज डाईंग लाइफलाइन’ को 2 लाख रुपये का पहला पुरस्कार, एक ट्रॉफी और एक प्रमाण पत्र दिया गया। जम्मू और कश्मीर की डॉक्यूमेंट्री फिल्म इस बात पर चिंता जताती है कि कैसे विभिन्न अपशिष्टों के दूध गंगा नदी के प्राचीन जल में मुक्त प्रवाह ने इसे प्रदूषित किया है और घाटी के लोगों की समग्र भलाई के लिए इसके जीर्णोद्धार की आवश्यकता है। फिल्म अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू में है और इसके उपशीर्षक अंग्रेजी में हैं।
आंध्र प्रदेश के कदारप्पा राजू की 'फाइट फॉर राइट्स' को दूसरा पुरस्कार 1.5 लाख रुपये, एक ट्रॉफी और एक प्रमाण पत्र दिया गया। फिल्म बाल विवाह और शिक्षा के मुद्दे को उठाती है तमिलनाडु के श्री आर. रविचंद्रन द्वारा ‘गॉड’ को 1 लाख रुपये, एक ट्रॉफी और एक प्रमाण पत्र दिया गया। मूक फिल्म में एक बूढ़े नायक के माध्यम से पीने योग्य पानी के मूल्य को बताया गया है।
चार फिल्मों को 'विशेष उल्लेख का प्रमाण पत्र' प्रदान किया गया, जिसमें प्रत्येक को 50,000 रुपये दिए गए। इनमें शामिल हैं: तेलंगाना के श्री हनीश उंद्रमतला की 'अक्षराभ्यासम'; तमिलनाडु के श्री आर. सेल्वम की 'विलायिला पट्टाथारी (एन इनएक्सपेंसिव ग्रेजुएट)' आंध्र प्रदेश के श्री मदका वेंकट सत्यनारायण की 'लाइफ ऑफ सीता' और आंध्र प्रदेश के श्री लोटला नवीन की 'बी ए ह्यूमन'।
पुरस्कार विजेताओं ने अपनी पुरस्कार विजेता लघु फिल्मों के निर्माण के पीछे के विचारों को भी साझा किया।
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