एनएचआरसी ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बंधुआ मजदूरी पर नई एडवाजरी जारी की; इसके साथ ही देरी से बचने के लिए आपराधिक कार्यवाही के परिणामों को अलग रखते हुए बंधुआ मजदूरी के पीडि़तों को राहत पैकेज जारी करने की सिफारिश की।



नई दिल्ली, 14 दिसंबर, 2021

न्यायमूर्ति श्री अरुण मिश्रा, अध्यक्ष, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, एनएचआरसी, भारत ने बंधुआ मजदूरी के पीड़ितों को राहत पैकेज जारी करने में अत्यधिक देरी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक नई एडवाइजरी में, आयोग ने उन्हें मामले में आपराधिक कार्यवाही के परिणाम से राहत पैकेज के मुद्दे को अलग करने के प्रयास हेतु कहा है क्योंकि पीड़ित का इस पर कोई नियंत्रण नहीं होता है और न ही मुकदमे में जुड़ा होता है।

बंधुआ मजदूरी की व्यापकता के संबंध में, आयोग ने कहा है कि राज्य और जिला स्तर के पदाधिकारियों का ध्यान केवल ईंट भट्टों तक ही सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन क्षेत्रों में भी होना चाहिए जहां बंधुआ मजदूरी प्रणाली निर्माण उद्योग जैसे शॉपिंग मॉल, कॉल सेंटर, मसाज पार्लर, आदि नए रूपों में प्रकट हुई है। मौजूदा अधिनियम और योजना के अनुसार उन्हें राहत प्रदान करने के लिए बंधुआ मजदूरी के नए रूपों की पहचान करने की आवश्यकता है।

बंधुआ मजदूरी पर प्रस्तावित राष्ट्रीय पोर्टल में अन्य बातों के साथ-साथ पुनर्वास डेटा, सतर्कता समितियों के दौरे और कामकाज का विवरण, राज्य के श्रम विभागों से प्राप्त डेटा, सर्वेक्षण से संबंधित डेटा, बंधुआ मजदूरों को नकद और गैर-नकद लाभों की प्रगति से संबंधित डेटा, लंबित आपराधिक मामले और जांच शुरू करने की तिथि और मामले के प्रबंधन के परिणाम और विशेषताएं शामिल होने चाहिए।

जिला प्रशासन रिहा किए गए मजदूरों को भोजन और सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने का खर्च वहन करे।

गैर-नकद सहायता के संदर्भ में, जिला मजिस्ट्रेट को यह सुनिश्चित करने के लिए कि सीएसएस-2016 के तहत उपलब्ध लाभ जैसे कि आवास-स्थल और कृषि भूमि का आवंटन, भूमि विकास, कम लागत वाली आवास इकाइयों का प्रावधान, पशुपालन, डेयरी, मुर्गी पालन, सुअर पालन आदि, मजदूरी रोजगार, न्यूनतम मजदूरी का प्रवर्तन आदि, लघु वन उत्पादों का संग्रह और प्रसंस्करण, लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और बच्चों को शिक्षा, रिहा किए गए बंधुआ मजदूरों के परिवारों को दी जानी चाहिए।

आयोग ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को अत्यधिक कमजोर परिस्थितियों में परिवारों की पहचान करने के लिए कहा है ताकि कमजोर और हाशिए के समुदायों को मुफ्त राशन, स्वास्थ्य देखभाल और अन्य सामाजिक सुरक्षा कवर प्रदान करके बंधुआ मजदूरी की किसी भी घटना को रोका जा सके।

इस एडवाइजरी के अन्य महत्वपूर्ण घटकों में से एक यह है कि आयोग ने संबंधित प्राधिकारियों से कहा है कि वे अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989) के प्रावधानों को भी लागू करें, यदि कोई बंधुआ मजदूर उन समुदायों से संबंधित है, तो उन्हें लागू करने के अलावा उसे राहत देने के लिए बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम के प्रावधान करता है।

आयोग ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और कानूनी प्रावधानों के क्रियान्वयन में कमियों को दूर करने को भी कहा है। पहचान, बचाव, प्रत्यावर्तन और उनके पुनर्वास के अलावा बंधुआ मजदूरी की रोकथाम पर बहुत जोर दिया गया है।

ई-श्रम पोर्टल पर अनौपचारिक श्रमिकों के पंजीकरण को सरल बनाने के साथ-साथ कॉर्पस फंड के निर्माण और पुनर्भुगतान की प्रक्रिया को भी सरल बनाने के लिए कहा गया है।

आयोग ने अपने महासचिव श्री बिंबाधर प्रधान के माध्यम से केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों / प्रशासकों को लिखे पत्र में एडवाइजरी में दी गई अपनी सिफारिशों को लागू करने और 90 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्‍तुत करने के लिए कहा है।

विस्तृत एडवाइजरी यहाँ क्लिक करें लिंक से वेबसाइट पर देखी जा सकती है।

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