एनएचआरसी वाद-विवाद प्रतियोगिता में सीआईएसएफ ने सीएपीएफ के लिए सर्वश्रेष्ठ टीम के रूप में रनिंग ट्रॉफी जीती, एनएचआरसी के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति श्री अरुण मिश्रा ने कहा कि, विरोधी से निपटने में आनुपातिक बल का प्रयोग करने की अवधारणा मानव धर्म के भारतीय विचार..



एनएचआरसी के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति श्री अरुण मिश्रा ने कहा कि, विरोधी से निपटने में आनुपातिक बल का प्रयोग करने की अवधारणा मानव धर्म के भारतीय विचार में अंतर्निहित है।

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने आज कहा कि यूएपीए जैसे कुछ विशेष कानून मानवाधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए थे ताकि उन्हें छीना नहीं जा सके। एक विरोधी से निपटने में आनुपातिक बल का प्रयोग करने की अवधारणा मानव धर्म के भारतीय विचार में अंतर्निहित है। मानव अधिकारों का संवर्धन और संरक्षण भारतीय संस्कृति, दर्शन और अभ्यास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी उत्पत्ति प्राचीन भारतीय शास्त्रों में 'ऋग्वेद' से ही हुई है। यह रामायण काल में परिलक्षित हुआ जब भगवान राम ने लक्ष्मण को युद्ध के अतिविनाशकारी हथियारों के स्‍थान पर आनुपातिक बल का उपयोग करने की सलाह दी, और महाभारत काल में भी, जब योद्धा सिद्धांतों पर लड़ते थे, और सूर्यास्त के बाद घायलों की देखभाल के लिए विरोधी के शिविरों का दौरा करते थे।



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न्यायमूर्ति मिश्रा आज नई दिल्ली में सीआईएसएफ के सहयोग से आयोजित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के लिए एनएचआरसी की 27वीं वार्षिक वाद-विवाद प्रतियोगिता के मुख्य अतिथि के रूप में सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय मूल्य लोगों को प्रकृति के सभी तत्वों के संरक्षण और संवर्धन के लिए मार्गदर्शित करते हैं, जो पृथ्वी पर जीवन के लिए बहुत आवश्यक हैं। नैतिकता से विहीन तकनीक पर्यावरण और पृथ्वी पर जीवन के लिए विनाशकारी होगी।



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उन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता की रक्षा करने और प्रतिकूल परिस्थितियों में नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने में सशस्त्र बलों की भूमिका की सराहना की। वाद-विवाद प्रतियोगिता के विषय "संवैधानिक और विधिसम्‍मत शासन के लिए मानव अधिकारों का संरक्षण प्राथमिक पूर्व-आवश्‍यकता है", का उल्लेख करते हुए एनएचआरसी अध्यक्ष ने कहा हालांकि यह प्रस्ताव के खिलाफ बोलने वालों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण था, दिए गए तर्क प्रस्ताव के पक्ष और विपक्ष में प्रतिभागियों द्वारा उनके संचालन के दौरान दिए जाने वाले मानवाधिकारों के प्रति उनकी संवेदनशीलता और समझ का संकेत है, जो केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए इस वाद-विवाद प्रतियोगिता का उद्देश्य है।

सीआईएसएफ ने हिंदी और अंग्रेजी दोनों वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के अंतिम दौर में जीत हासिल कर समग्र सर्वश्रेष्ठ टीम रोलिंग ट्रॉफी जीती। व्यक्तिगत सम्मानों में, हिंदी में वाद-विवाद के लिए प्रथम पुरस्कार उप निरीक्षक, विकेश तिमांडे, आरपीएफ, और अंग्रेजी में उप निरीक्षक, नाज़िश खान, सीआईएसएफ को मिला। हिंदी में द्वितीय पुरस्कार कॉन्स्टेबल, प्रांजल उपाध्याय, असम राइफल्स, और अंग्रेजी में डिप्टी कमांडेंट, शिंदे मेहुल पांडुरंग, सीआईएसएफ को मिला। हिंदी में तृतीय पुरस्कार संयुक्त रूप से उप निरीक्षक प्रियंका ठाकुर, आरपीएफ, और राइफलमैन, मनोज कुमार उपाध्याय, असम राइफल्स द्वारा साझा किया गया था, और अंग्रेजी में यह डिप्टी कमांडेंट, राघवेंद्र सिंह, सीआईएसएफ को दिया गया था। प्रमाण पत्र और एक स्मृति चिन्ह के अलावा प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार विजेताओं को क्रमशः 12,000/- रुपये, 10,000/- रुपये और 8,000/- रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया।



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हिंदी के लिए विजेताओं का निर्णय एनएचआरसी के सदस्य डॉ. डी. एम. मुले और अंग्रेजी के लिए एनएचआरसी के सदस्य श्री राजीव जैन, झारखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री कमल नयन चौबे और प्रो (डॉ.) हरप्रीत कौर, वाइस चांसलर (आई/सी), नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली द्वारा किया गया था।

वाद-विवाद पर अपनी टिप्पणी देते हुए, डॉ. डी. एम. मुले, एनएचआरसी सदस्य ने प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की लेकिन उनसे उम्मीद की कि वे विषय की भावना को आत्मसात करके प्रस्ताव के पक्ष और विपक्ष में अपना तर्क तैयार करेंगे। उन्हें न केवल सुरक्षा बलों और उनसे संबंधित चुनौतियों के चश्मे से बल्कि विभिन्न अधिकारों के आलोक में भी इसे देखने की जरूरत थी। श्री राजीव जैन, सदस्य, एनएचआरसी ने भी प्रयासों की सराहना की लेकिन कहा कि प्रतिभागियों को अपने तर्क विषय के प्रत्येक शब्द से संबंधित रखने की आवश्यकता है, जो कि उनकी उच्च पिच डिलीवरी में खोने नहीं चाहिए।

इससे पहले, श्री डी.के. सिंह, महासचिव, एनएचआरसी ने कहा कि सुरक्षा बलों के कंधों पर लोगों के साथ निष्पक्ष व्यवहार करने की जबरदस्त जिम्मेदारी है, बिना उन्हें यह अहसास दिलाए कि कानून के शासन को कायम रखते हुए कहीं भी उनके अधिकारों का बलिदान किया गया था।

कार्यक्रम के उद्घाटन भाषण में एनएचआरसी के महानिदेशक (अन्‍वेषण) श्री मनोज यादव ने कहा कि इस वाद-विवाद प्रतियोगिता की अवधारणा यह है कि कानून का शासन और मानवाधिकारों की सुरक्षा, सुरक्षा बलों के कामकाज में व्याप्त होनी चाहिए।

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