एनएचआरसी ने पश्चिम बंगाल में 2020 में पुलिस द्वारा भारतीय जनता युवा मोर्चा की रैली में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक और अनुपातहीन बल के प्रयोग और क्रूरता को गंभीरता से लिया; राज्य सरकार को कारण बताने के लिए कहा है कि पीड़ितों के लिए...



एनएचआरसी ने पश्चिम बंगाल में 2020 में पुलिस द्वारा भारतीय जनता युवा मोर्चा की रैली में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक और अनुपातहीन बल के प्रयोग और क्रूरता को गंभीरता से लिया; राज्य सरकार को कारण बताने के लिए कहा है कि पीड़ितों के लिए मौद्रिक राहत की सिफारिश क्यों नहीं की जाए।

नई दिल्ली, 27 अप्रैल, 2023

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, एनएचआरसी, भारत ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर पुष्टि की कि अक्टूबर, 2020 को हावड़ा, दनकुनी, सतरागाछी और पश्चिम बंगाल के अन्य स्थानों पर भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा आयोजित शांतिपूर्ण रैली 'नबन्ना चलो' के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा न्‍यूनाधिक बल, क्रूरता और अत्याचारों को गंभीरता से लिया है। आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार को उसके मुख्य सचिव के माध्यम से नोटिस जारी निर्देश दिया है कि वह 6 सप्ताह के भीतर कारण बताएं कि आयोग को यह सिफारिश क्यों नहीं करनी चाहिए कि राज्य सरकार उस पीड़ित को 1 लाख रुपये, जिसको पुलिस कर्मियों द्वारा बाल पकड़कर घसीटा गया था और निर्दयतापूर्वक पीटा गया था तथा दो अन्य पीड़ितों, प्रत्‍येक को 50,000/- रुपये, जिन्हें मार्च के दौरान पुलिस द्वारा क्रूर शारीरिक यातनाएं दी गई थी, मौद्रिक राहत के रूप में भुगतान करें।

आयोग ने 14 अक्टूबर, 2020 की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था और राज्य सरकार के अधिकारियों को नोटिस जारी कर पुलिस की बर्बरता के आरोपों पर रिपोर्ट मांगी थी।

आयोग ने देखा है कि रिकॉर्ड में उपलब्ध दस्तावेजों, पश्चिम बंगाल सरकार से आयोग के नोटिस के जवाब में प्राप्त रिपोर्ट और शिकायतकर्ता की टिप्पणियों से यह स्पष्ट है कि शांतिपूर्ण रैली सरकार की अनुमति के बिना आयोजित की गई थी। जो भी हो, पुलिस ने अत्यधिक और अनुपातहीन बल का प्रयोग किया; चुनिंदा लोंगो की पिटाई हेतु प्रदर्शनकारियों की आसानी से पहचान करने के लिए कैनन में रंग/रासायनिक मिश्रित पानी का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस द्वारा नागरिकों पर इस्‍तेमाल किए गए इस तरह के अनैतिक व्यवहार को आयोग मंजूरी नहीं देता है।

. राज्य सरकार द्वारा ऑन रिकॉर्ड यह स्वीकार किया गया है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों का पीछा किया था जिससे यह स्पष्ट होता है कि जो लोग मार्च का हिस्सा थे, उन्हें पुलिस द्वारा बुरी तरह पीटा गया था। घटनास्थल पर मौजूद पीड़ितों की तस्वीरें यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि अनुपातहीन बल का इस्तेमाल किया गया था और लोगों को बेरहमी से पीटा गया और काफी दूर तक घसीटा गया। पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा सार्वजनिक रूप से महिलाओं की इतनी क्रूर तरीके से पिटाई की गई कि पीड़ितों में से एक की उंगली टूट गई और दूसरे के बाल खींचे गए और उनमें से कई को चोटें आईं, जो मानव अधिकारों के उल्लंघन का एक गंभीर मुद्दा है और आयोग के लिए चिंता का विषय है।

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